Friday, April 12, 2019

पाकिस्तानः क्वेटा में धमाका, 20 की मौत, कई घायल

पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा के हज़ारगंज इलाक़े में हुए एक बम धमाके में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं.

स्थानीय पुलिस के मुताबिक़ ये धमाका सुबह क़रीब आठ बजे (पाकिस्तान वक़्त के मुताबिक़) हज़ारगंज इलाक़े की सब्ज़ी मंडी में हुआ है.

समाचार एजेंसी एपीपी के मुताबिक़ पुलिस का कहना है कि धमाका बाज़ार में खड़ी पुलिस वैन को निशाना बनाकर किया गया.

डीआईजी पुलिस अब्दुल रज़्ज़ाक़ चीमा ने पत्रकारों से कहा, "इस हमले में कुल सौलह लोग मारे गए हैं जिनमें से आठ हज़ारा समुदाय से हैं. एक जवान है और बाक़ी लोग मंडी में काम करने वाले हैं.".

धमाके के बारे में उन्होंने बताया, "सुरक्षाबलों की एक गाड़ी सब्ज़ी मंडी में जब आलू की एक दुकान के सामने पहुंची तब ये धमाका हुआ."

जब उनसे पूछा गया कि क्या ये आत्मघाती धमाका था तो उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है.

ये धमाका आलुओं के एक गोदाम के बाहर हुआ है. जिस समय धमाका हुआ उस समय यहां लोग काम कर रहे थे.

धमाके के बाद सुरक्षाबलों ने इलाक़े को घेरे में ले लिया है. बम निरोधक दस्ता भी मौक़े पर भेजा गया है.

इस धमाके में कई लोग घायल भी हुए हैं जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है.

पुलिस के मुताबिक़ हज़ारगंज में हज़ारा शिया समुदाय से जुड़े लोग रहते हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ मारे गए और घायल हुए अधिकतर लोग इसी समुदाय से हैं.

पाकिस्तान में हज़ारा शिया लोगों को निशाना बनाकर पहले भी हमले किए जाते रहे हैं.

झुर्रियों से भरा चेहरा और कमज़ोर शरीर. छड़ी के बिना दो कदम चल भी नहीं सकते. कुछ कदम चलने के बाद उन्हें लंबी सांस लेनी पड़ती है. शिमला से करीब 280 किलोमीटर दूर किन्नौर ज़िले के ख़ूबसूरत से गांव कल्पा में लकड़ी के बने अपने घर में जब वह कुर्सी पर बैठते हैं तो उनके पीछे बर्फ़ से ढकी पहाड़ की चोटियां नजर आती हैं.

बातों का सिलसिला जब शुरू होता है तो वे उन सब बातों का ज़िक्र करते हैं जिसने उनके जीवन पर असर डाला है.

102 साल के श्याम सरन नेगी, अपनी उम्र और शारीरिक तक़लीफों के बावजूद एक बार फिर से लोकतंत्र के पर्व में भाग लेने को उत्साहित हैं. स्वतंत्र भारत के पहले मतदाता के तौर पर मशहूर नेगी को भारतीय लोकतंत्र का लीविंग लीजेंड भी कहा जाता है. उन्हें 19 मई का इंतजार है, जब किन्नौर सहित हिमाचल प्रदेश में चुनाव होना है. किन्नौर, मंडी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है.

अपनी क्षीण आवाज़ में नेगी याद करते हैं, "अक्तूबर, 1951 में मैंने पहली बार संसदीय चुनाव में वोट डाला था, इसके बाद मैंने एक भी चुनाव मिस नहीं किया. मैं अपने वोट की अहमियत को जानता हूं. अब तो मेरा शरीर भी साथ नहीं दे रहा है, लेकिन आत्मशक्ति के चलते मैं वोट देने जाता रहा हूं. इस बार भी मताधिकार का इस्तेमाल करना है. हो सकता है कि ये मेरा आख़िरी चुनाव हो. यह उम्मीद है, जिसे मैं अपने जीवन के अंतिम चरण में छोड़ना नहीं चाहता."

जब हमलोग नेगी जी से मिलने पहुंचे उस वक्त वे चुनाव आयोग की ओर से भेजे गए बूथ अधिकारी (बीएलओ) और स्थानीय प्रशासन के लोगों से घिरे हुए थे और नींबू चाय पीते हुए स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव के मतदान वाले दिन से जुड़ी यादों को शेयर कर रहे थे.

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